Saturday, July 21, 2018

उत्तर प्रदेश की कजरी.....उर्मिला सिंह

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हिंडोला झूल रही राधा प्यारी 
झुलावे कृष्ण मुरारी ना......
छाई काली घटा मतवारी
झुलावें कृष्ण मुरारी ना...

पी..पी..पपिहा सुर में गावे
कोयल प्यारी कुक सुनावे
मादक स्वर बंसी के बाजे
सुध बुध खोवें राधा रानी ना....
झुलावें कृष्ण मुरारी ना.....

ऊंची पेंग अम्बर को छुवे
प्रेम मगन राधे ..मोहन देखें
रुनझुन बाज रही पैजनिया
हँसि हँसी हरि झूला झुलावे ना...

झूला झूल रही राधे प्यारी
झुलावें कृष्ण मुरारी ना...

गोप गोपी हँसी हँसी नाचे
हर्षित मेघा जल बरसावे
देव मुनी बलि बलि जावें
देख के अनुपम जोड़ी ना....
झुला झूल रहीं राधा प्यारी
झुलावें कृष्ण मुरारी ना.....
-उर्मिला सिंह

8 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (22-07-2018) को "गीत-छन्द लिखने का फैशन हुआ पुराना" (चर्चा अंक-3040) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत सुन्दर

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  3. मनमोहक, सुंदर रचना👌👌👌

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  4. सुंदर रचना 👌👌👌

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  5. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक २३ जुलाई २०१८ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  6. बेहतरीन रचना

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  7. बहुत सुंदर दी मन भावन कजरी। जो सावन मे गाई जाने वाली रागिनी है और झूले से जुड़ी है उसकी तानें।

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  8. बहुत प्यारा गीत

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