आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (01-01-2018) को "नया साल नयी आशा" (चर्चा अंक-2835) पर भी होगी। -- चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है। जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये। नववर्ष 2018 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ। सादर...! राधा तिवारी
हम अक्सर सामने वाले के अनुभव को समझने की कोशिश ही नहीं करते। एक पुरुष होने के नाते हम सोचते हैं कि हम सब समझ रहे हैं, लेकिन सच में स्त्री होने का भाव, उसका संघर्ष, उसकी संवेदनाएँ अलग ही दुनिया है। और कमाल यह है कि स्त्री अक्सर हमारे भीतर की सच्चाई हमसे पहले पढ़ लेती है।
सच
ReplyDeleteवाह!!सुंदर।
ReplyDeleteवाह ...👌
ReplyDeleteबहुत सुन्दर
ReplyDeleteआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (01-01-2018) को "नया साल नयी आशा" (चर्चा अंक-2835) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
नववर्ष 2018 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
राधा तिवारी
हम अक्सर सामने वाले के अनुभव को समझने की कोशिश ही नहीं करते। एक पुरुष होने के नाते हम सोचते हैं कि हम सब समझ रहे हैं, लेकिन सच में स्त्री होने का भाव, उसका संघर्ष, उसकी संवेदनाएँ अलग ही दुनिया है। और कमाल यह है कि स्त्री अक्सर हमारे भीतर की सच्चाई हमसे पहले पढ़ लेती है।
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