Friday, December 15, 2017

दो पल की जिंदगी......अवधेश प्रसाद

दो पल की जिंदगी
मुझे कोई उधार दे दे 
पतझड़ सी जिंदगी मे
थोडी बहार दे दे।
आने को कोई कह दे 
बेचैन-सी मै हो लूं 
वो आए या न आए
पर इंतजार दे दे ।
जीने पर चाहूं मरना
मरने पर चाहूं जीना
इस बेकरार दिल को
कोई करार दे दे ।
नाजुक ये नब्ज आंखें 
अब बंद होने को है
अर्थी उठाने ही को 
दो दो कहार ले ले ।
-अवधेश प्रसाद

10 comments:

  1. बहुत बहुत सुंदर रचना👌

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  2. व्यथित मन की छोटी छोटी अभिलाषाऐं जैसे एक मुठ्ठी आसमान तो सबका हक बनता है।
    सुंदर रचना।

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (16-12-2017) को "सब कुछ अभी ही लिख देगा क्या" (चर्चा अंक-2819) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. बहुत सुंदर रचना

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  5. अति मार्मिक रचना ...
    अर्थी उठाने को कहार देदो ....
    कितनी व्यथा भरी शब्दो मै
    आस संग निराश भरी
    असमँजस मै दिल है कोमल
    जब जो हो जाये सही !

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  6. बहुत बढ़ीया।

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