Monday, December 25, 2017

हाइकु भूमि......रामशरण महर्जन


मन के रंग
रंग देता जन को
हाइकु भूमि |

उड़ते पंछी
सवारते जीवन
स्मृति के पन्ने |

अमूल्य देह
मत फेंको वक्त पे
जीवन डालो |

बात बात को
ठुकराना नहीं तू
शब्द बाण से |

खिलौना नहीं
और से मत तौलो
बड़ी है ज्यान |

चंचल बच्चें
रंग भरता  हमें
रूठी पल में |

दुखों के आँशु
सवारता जिंदगी
शक्ति बना लो |

प्यार की डोरें
बांधता जन्म-जन्म
रिश्तें हमारा |

डूबता रहा
पहचाने आप को
झील हाइकु |

जीनें सहारा
मुश्किलों से सामना
ये हुई बात |

जगाते रहो
उम्मीदों को दीप पे
फूलों के वर्षा |
- रामशरण महर्जन
काठमाण्डू
नेपाल



4 comments:

  1. बहुत बढ़िया।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (26-12-2017) को "स्वच्छता ही मन्त्र है" (चर्चा अंक-2829) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    क्रिसमस हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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