Sunday, December 3, 2017

शबनम की माला....कुसुम कोठारी

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सुबह धुंध से
धोई सी 
शबनम की माला
पोई सी 
गजल अभी तक
सोई सी 
आंख है क्यों कुछ
रोई सी 
यादें यादों मे
खोई सी 
गूंजी कानो मे
सरगोई सी
मन वीणा से
झंकृत हो
शब्दों की लड़ियां
संजोई सी ।

- कुसुम कोठारी 

4 comments:

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    1. सादर आभार।
      शुभ संध्या।

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  2. आदरणीय/आदरणीया आपको अवगत कराते हुए अपार हर्ष का अनुभव हो रहा है कि हिंदी ब्लॉग जगत के 'सशक्त रचनाकार' विशेषांक एवं 'पाठकों की पसंद' हेतु 'पांच लिंकों का आनंद' में सोमवार ०४ दिसंबर २०१७ की प्रस्तुति में आप सभी आमंत्रित हैं । अतः आपसे अनुरोध है ब्लॉग पर अवश्य पधारें। .................. http://halchalwith5links.blogspot.com आप सादर आमंत्रित हैं ,धन्यवाद! "एकलव्य"


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    1. जी सादर आभार।
      शुभ संध्या।

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