Monday, August 14, 2017

थम न जाए कहीं जुनूँ....फरिहा नकवी

ऐ मिरी ज़ात के सुकूँ आ जा 
थम न जाए कहीं जुनूँ आ जा 

रात से एक सोच में गुम हूँ 
किस बहाने तुझे कहूँ आ जा 

हाथ जिस मोड़ पर छुड़ाया था 
मैं वहीं पर हूँ सर निगूँ आ जा 

याद है सुर्ख़ फूल का तोहफ़ा? 
हो चला वो भी नील-गूँ आ जा 

चाँद तारों से कब तलक आख़िर 
तेरी बातें किया करूँ आ जा 

अपनी वहशत से ख़ौफ़ आता है 
कब से वीराँ है अंदरूँ आ जा 

इस से पहले कि मैं अज़िय्यत में 
अपनी आँखों को नोच लूँ आ जा 

देख! मैं याद कर रही हूँ तुझे 
फिर मैं ये भी न कर सकूँ आ जा 
-फरिहा नकवी
प्रस्तोताः अशोक खाचर

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर‎ ........,

    ReplyDelete
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (15-08-2017) को "भारत को करता हूँ शत्-शत् नमन" चर्चामंच 2697 पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    स्वतन्त्रता दिवस और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  3. बुलाने के लिये इससे अच्छा न्योता नहीं हो सकता . लाज़वाब

    ReplyDelete