Monday, July 31, 2017

मैंने छुआ, सहलाया उन्हें...शबनम शर्मा


बीच बाज़ार 
खिलौने वाले 
के खिलौने 
की आवाज़ से 
आकर्षित हो 
क़दम उसकी 
तरफ़ बढ़े।

मैंने छुआ,
सहलाया उन्हें 
व एक खिलौने 
को अंक में भरा
कि पीछे से कर्कष 
आवाज़ ने मुझे 
झंझोड़ा; 
‘‘तुम्हारी बच्चों की-सी 
हरकतें कब खत्म होंगी’’
सुनकर मेरा नन्हा बच्चा 
सहम-सा गया 
मेरी प्रौढ़ देह के अन्दर।
-शबनम शर्मा

5 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (01-08-2017) को जयंती पर दी तुलसीदास को श्रद्धांजलि; चर्चामंच 2684 पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. कहाँ खो गए ऐसे खिलौनेवाले !!

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  3. प्रौढ़ देह के अन्दर नन्हा बच्चा....
    वाह वाह

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  4. बचपन ऐसा ही होता है ... पल में आकर्षित होता है और पल में ही सहम जाता है ... मन में रहे सदा बचपन ...

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