Wednesday, July 19, 2017

थोड़ा रोमांच भर लायें.....निधि सक्सेना



बहुत कड़वा हो गया है जिंदगी का स्वाद
चलो किसी खूबसूरत वादी से
थोड़ा रोमांच भर लायें..
मुद्दत हुई हमें जी भर के हँसे
चलें किसी दरिया किनारे
मौजों से थोड़ी मौजें मांग लायें..
दरक गया है कहीं कुछ भीतर
मन ठंडे बस्ते में पड़ा रहता है
चलो चाँद के थोड़ा करीब चलो
रूमानी होने का खेल करो
भीगे पाँव कुछ अठखेलियाँ हों
कि जिंदगी के मिज़ाज कुछ जहीन हों...
~निधि सक्सेना

8 comments:

  1. वैसे भी तरो-ताजा होने के लिए बदलाव बहुत जरुरी है

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (20-07-2017) को ''क्या शब्द खो रहे अपनी धार'' (चर्चा अंक 2672) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. वाहः
    खूबसूरत कविता

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  4. नमस्ते, आपकी यह रचना गुरूवार 20 जुलाई 2017 को "पाँच लिंकों का आनंद "http://halchalwith5links.blogspot.in के 734 वें अंक में लिंक की गयी है। चर्चा में शामिल होने के लिए अवश्य आइयेगा ,आप सादर आमंत्रित हैं। सधन्यवाद।

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  5. सुंदर ख्याल के साथ साथ बहुत बढिया प्रस्तुति.
    धन्यवाद।

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  6. बहुत सुन्दर..।

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  7. बहुत अच्छी कविता |

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