Friday, July 21, 2017

माँ की सीख..... निधि सक्सेना



सुनो बेटा
वहाँ परदेस में
अपनी दोनों कलाईयों पर घड़ी बाँधे रखना..
हाँ ये कुछ अजीब जरूर है
पर इसमें हर्ज कुछ नही..
तुम्हारी बायीं कलाई पर बंधी घड़ी स्थानिक समय दिखाए
वहां की धारा के संग बहने के लिए..
और दायीं कलाई पर बंधी घड़ी पर
भारत का समय बाँधना 
कि अपने दायीं ओर से तुम हमेशा आश्वस्त रहो
कि हम हैं यहाँ हर वक्त हर घड़ी..
कि तुम्हें यहाँ के समय का संज्ञान रहे
कि तुम हमेशा बंधे रहो 
अपने भूमि से
अपने रिश्तों से..
कि घड़ी की टिक टिक
तुम्हें यहाँ की मधुरता की याद दिलाती रहे
पल पल आशा और सुख की स्मृतियाँ रहें
और वही टिक टिक
हर निराशा और कुंठा मिटाती रहे
लाचारी और बेबसी विस्मृत कराती रहे....
- निधि सक्सेना

1 comment:

  1. माँ की सीख बेमिसाल है।

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