Sunday, July 20, 2014

तुम्हारा भीना संदेश............फाल्गुनी



















जब सोचा था तुमने
दूर कहीं मेरे बारे में
यहाँ मेरे हाथों की चुड़ियाँ छनछनाई थी।


जब तोड़ा था मेरे लिए तुमने
अपनी क्यारी से पीला फूल
यहाँ मेरी जुल्फें लहराई थी।


जब महकी थी कोई कच्ची शाख
तुमसे लिपट कर
यहाँ मेरी चुनरी मुस्कुराई थी।


जब निहारा था तुमने उजला गोरा चाँद
यहाँ मेरे माथे की
नाजुक बिंदिया शर्माई थी।


जब उछाला था तुमने हवा में
अपना नशीला प्यार
यहाँ मेरे बदन में बिजली सरसराई थी।


तुम कहीं भी रहो और
कुछ भी करों मेरे लिए,
मेरी आत्मा ले आती है
तुम्हारा भीना संदेश
मेरे जीवन का बस यही है शेष।


-फाल्गुनी


11 comments:

  1. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 21/07/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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  2. सुन्दर प्रस्तुति

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  3. सुन्दर रचना...

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  4. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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  5. तुम कहीं भी रहो और
    कुछ भी करों मेरे लिए,
    मेरी आत्मा ले आती है
    तुम्हारा भीना संदेश
    मेरे जीवन का बस यही है शेष। ... bahut sundar !

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  6. जब तोड़ा था मेरे लिए तुमने
    अपनी क्यारी से पीला फूल
    यहाँ मेरी जुल्फें लहराई थी।
    खुबसूरत रचना

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