Tuesday, June 10, 2014

तुम्हारी यादें....................फाल्गुनी

 














जब-जब मानसून बरसा
उसके साथ बरसे तुम
तुम्हारी यादें
तुम्हारी बातें
और मेरी आँखें।

जब-जब मानसून बरसा
उसके साथ बरसा मेरा वजूद
भीगा मेरा मन
और बढ़ उठी तपन।

जब-जब मानसून बरसा
उसके साथ बरसी
तुम्हारी तीखी बातों की किरचें
मन में जहाँ-तहाँ उग आई
बिन मौसम की मिरचें।

मानसून नहीं बरसा है यह
इसके साथ, बस बरसे हो तुम
कैसे बरसता मानसून
जब मेरी मन-धरा से तुम हो गए हो गुम। 


-फाल्गुनी

5 comments:

  1. मॉनसून अपने साथ कई भूली-बिसरी यादें ले कर आता है...और मन थोड़ा सा रूमानी हो जाता है...

    ReplyDelete
  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

    ReplyDelete
  3. Bahut hee bhavpurna abhivykti, yaadon mein sarabor.................

    ReplyDelete