Wednesday, June 11, 2014

मन कहीं खोना चाहता है............फाल्गुनी














  

खिले थे गुलाबी, नीले,
हरे और जामुनी फूल
हर उस जगह
जहाँ छुआ था तुमने मुझे,



महक उठी थी केसर
जहाँ चूमा था तुमने मुझे,

बही थी मेरे भीतर नशीली बयार
जब मुस्कुराए थे तुम,


और भीगी थी मेरे मन की तमन्ना
जब उठकर चल दिए थे तुम,

मैं यादों के भँवर में उड़ रही हूँ
अकेली, किसी पीपल पत्ते की तरह,
तुम आ रहे हो ना
थामने आज ख्वाबों में,


मेरे दिल का उदास कोना
सोना चाहता है, और
मन कहीं खोना चाहता है
तुम्हारे लिए, तुम्हारे बिना। 


-फाल्गुनी

8 comments:

  1. खूबसूरत आत्म अभिव्यक्ति...

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  2. बहुत ही सुन्दर।

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 12-06-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1641 में दिया गया है
    आभार

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  4. आपकी लिखी रचना शुक्रवार 13 जून 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  6. बहुत ही सुन्दर।

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  7. सुंदर भाव। सुंदर कविता।

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  8. I wish I had a poetry speaking girlfriend...Languages तो हर कोई बोल लेता है।

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