Friday, May 2, 2014

ये रिश्ता अपना नाकामियों के साथ............अमित हर्ष



रुसवाई .. थोड़ी बदनामियों के साथ
कीजिये कुबूल हमें खामियों के साथ

भगवान, तो किसी को शैतान बना देना
सुलूक अच्छा नहीं ये आदमियों के साथ

सियासत ने ज्यादा मज़हबी बना दिया
सुबह सनातनी शाम नमाज़ियों के साथ

ख्वाहिशें, ख्वाब इफरात में मिलेगें
गुज़ारा कीजिये तो कमियों के साथ

कामयाबी से निभाया है ‘अमित’ ने
ये रिश्ता अपना नाकामियों के साथ

-अमित हर्ष

11 comments:

  1. बहुत खूब ,

    मेरी नकामिओं ने मेरे लम्हात लिख दिए
    गुज़री तमाम रात तन्हाईओं के साथ
    अज़ीज़ जौनपुरी

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  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    इस पोस्ट की चर्चा, शनिवार, दिनांक :- 03/05/2014 को "मेरी गुड़िया" :चर्चा मंच :चर्चा अंक:1601 पर.

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  3. ख्वाहिशें, ख्वाब इफरात में मिलेगें
    गुज़ारा कीजिये तो कमियों के साथ
    वाह .... बेहतरीन

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  4. बढ़िया ग़ज़ल

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  5. बहुत सुंदर प्रस्तुति.

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  6. सियासत ने ज्यादा मज़हबी बना दिया
    सुबह सनातनी शाम नमाज़ियों के साथ
    वाह वाह बहत खूब अमित जी।

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  7. सुबह सनातनी शाम नमाज़ियों के साथ
    बहुत बढ़िया, बखिया उधेड़ दी सियासतदानों की आपने

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  8. सियासत ने ज्यादा मज़हबी बना दिया
    सुबह सनातनी शाम नमाज़ियों के साथ

    अच्छा शेर है

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