Saturday, April 26, 2014

कुछ आन जरुरी लगती है..........मनोज सिंह"मन"


इक़ दर्द छुपा हो सीने में,तो मुस्कान अधूरी लगती है,
जाने क्यों,बिन तेरे,मुझको हर शाम अधूरी लगती है,

कहना है,तुमसे दिल को जो,वो बात जरुरी लगती है,
तेरे बिन मेरी गज़लों की,हर बात अधूरी लगती है,

दिल भी तेरा,हम भी तेरे,एक आस जरुरी लगती है,
अब बिन तेरे,मेरे दिल को,हर सांस अधूरी लगती है,

माना की जीने की खातिर,कुछ आन जरुरी लगती है,
जाने क्यों,"मन"को तेरे बिन,ये शान अधूरी लगती है,

मनोज सिंह"मन"


8 comments:

  1. लाजवाब शेर हैं इस गज़ल के ...

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  2. अति सुन्दर...बहुत खूब...

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  3. बहुत सुन्दर और प्रभावपूर्ण
    मन को छूती हुई
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई

    आग्रह है----
    और एक दिन

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  4. बेहतरीन, उम्दा !!

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