Wednesday, May 29, 2019

बूंद मिलन का इक जरिया है.....डॉ. अनु सपन

वादे भरे विकासी बादल 
है घनघोर सियासी बादल।

कहीं मसर्रत दे जायेंगे,
देंगें कहीं उदासी बादल।

कहीं अयोध्या सी बेचैनी
और कहीं पर काशी बादल।

वायुयान से खेल रहे हैं
नभ में घिरे कपासी बादल ।

बूंद मिलन का इक जरिया है
धरती छुए अकासी बादल।

मन में जब से तुम आये हो
आँखों खिले पलाशी बादल।

तुझसे जग मीठा नग़मा है
तुझ बिन लगे मिरासी बादल।।
डॉ. अनु सपन
( सर्व अधिकार सुरक्षित)

6 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 30.5.19 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3351 में दिया जाएगा

    धन्यवाद

    ReplyDelete
  2. आपकी लिखी रचना "साप्ताहिक मुखरित मौन में" शनिवार 1 जून 2019 को साझा की गई है......... "साप्ताहिक मुखरित मौन" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    ReplyDelete
  3. कहीं मसर्रत दे जायेंगे,
    देंगें कहीं उदासी बादल।
    ऐसे ही हैं ये बादल ....
    सुंदर रचना

    ReplyDelete