Sunday, April 21, 2019

ताँका....डॉ. सुरंगमा यादव

*
निज शक्ति का
हनुमत को जब 
हुआ आभास
पल में लाँघ लिया 
निस्सीम पारावार ।

*
प्रकृति सदा 
निरत रहती है 
निज कार्यों में 
मनुज होकर तू
व्यर्थ वक़्त बिताये।

*
पथ बाधा से 
विचलित होकर 
जीवन व्यर्थ 
सच्चा मनुज वही 
जो करता संघर्ष।
-डॉ. सुरंगमा यादव

3 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 22.4.2019 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3313 में दिया जाएगा

    धन्यवाद

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  2. बहुत सुन्दर
    सादर

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