Monday, February 15, 2016

टूटना शुभ होता है कांच का .... सदा


हर सवाल का जवाब ढूंढना या देना जाने क्यों, 
कभी-कभी ऐन वक्त पर मुश्किल हो जाता है ।

गिरकर उठना फिर संभल जाना संभव होता है, 
नजरों में गिरकर उठ पाना मुश्किल हो जाता है ।

लड़ लेता है इंसान हर लड़ाई गैरों से हर तरह, 
अपनों से लड़कर जीतना मुश्किल हो जाता है ।

टूटना शुभ होता है कांच का कहते हैं बला टली, 
टुकड़ा चुभ जाए कोई जब मुश्किल हो जाता है ।

कोई हमसफर हो साथ तो रास्ता कट जाता है, 
जाने कब, तन्हा सफर 'सदा' मुश्किल हो जाता है ।

शनिवार, 31 अक्तूबर 2009

9 comments:

  1. आपने लिखा...
    कुछ लोगों ने ही पढ़ा...
    हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 16/02/2016 को पांच लिंकों का आनंद के
    अंक 214 पर लिंक की गयी है.... आप भी आयेगा.... प्रस्तुति पर टिप्पणियों का इंतजार रहेगा।

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  2. लड़ लेता है इंसान हर लड़ाई गैरों से हर तरह,
    अपनों से लड़कर जीतना मुश्किल हो जाता है ।
    सही है। बढ़िया प्रस्तुति।

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  3. लड़ लेता है इंसान हर लड़ाई गैरों से हर तरह,
    अपनों से लड़कर जीतना मुश्किल हो जाता है ।
    सही है। बढ़िया प्रस्तुति।

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  4. गिरकर उठना फिर संभल जाना संभव होता है,
    नजरों में गिरकर उठ पाना मुश्किल हो जाता है बहुत खूब वाह!!

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  5. गिरकर उठना फिर संभल जाना संभव होता है,
    नजरों में गिरकर उठ पाना मुश्किल हो जाता है बहुत खूब वाह!!

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