Thursday, June 13, 2013

पापा अब भी तुम जादूगर हो.........अपूर्वा रघुवंशी

 
जब छोटी थी तो सोचती थी
पापा तुम जादूगर हो
हर समस्या का हल है
तुम्हारी बन्द मुट्ठी में
जब बड़ी हुई तो जाना
उलझे हो हर वक्त तुम
मेरी समस्या सुलझाने में

जब छोटी थी तो सोचती थी
पापा ने दुनिया देखी है
जब बड़ी हुई तो जाना
मैं पापा की दुनिया हूँ

जब छोटी थी तो सोचती थी
पापा की जेब में तारे हैं
जब बड़ी हुई तो जाना
मैं पापा की आँखों का तारा हूँ

जब छोटी थी तो सोचती थी
तुम सबसे अच्छे पापा हो
जब बड़ी हुई तो जाना
पापा तुम सबसे अच्छे हो

अब मैं बड़ी हो गई पापा
जान गई हूँ जीवन को
उतना आसान नहीं है यह
जैसा बचपन में लगता था

...पर अब भी
हर मुश्किल का हल
बन्द है तुम्हारी मुट्ठी में
पापा अब भी तुम जादूगर हो

---अपूर्वा रघुवंशी

मधुमिता....12-6-2013
16 जून फादर्स डे पर विशेष

5 comments:

  1. पापा के लिए तो सच में उनके बच्चे ही उनकी दुनिया है
    बेहतरीन
    साभार !

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  2. दिल को छूती बहुत प्यारी रचना...

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  3. bhot achchi rahna hai waaaaaaaaah bhot khub

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  4. अच्छी रचना अपूर्वा
    बहुत सुंदर

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