Tuesday, June 4, 2013

मिलेगी बेवफ़ा से पर ज़फ़ा अक्सर............सतपाल ख्याल


वो आ जाए ख़ुदा से की दुआ अक्सर
वो आया तो परेशाँ भी रहा अक्सर

ये तनहाई ,ये मायूसी , ये बेचैनी
चलेगा कब तलक ये सिलसिला अक्सर

न इसका रास्ता कोई ,न मंजिल है
‘मोहब्बत है यही’ सबने कहा अक्सर

चलो इतना ही काफ़ी है कि वो हमसे
मिला कुछ पल मगर मिलता रहा अक्सर

वो ख़ामोशी वही दुख है वही मैं हूँ
तेरे बारे में ही सोचा किया अक्सर

ये मुमकिन है कि पत्थर में ख़ुदा मिल जाए
मिलेगी बेवफ़ा से पर ज़फ़ा अक्सर

--सतपाल ख्याल

13 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज मंगलवार (04-06-2013) को तुलसी ममता राम से समता सब संसार मंगलवारीय चर्चा --- 1265 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बेहतरीन गज़ल !

    चलो इतना ही काफ़ी है कि वो हमसे
    मिला कुछ पल मगर मिलता रहा अक्सर

    यूँ ही मिलते रहिए...फ़ासले मिट जाएँगे।

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  3. न इसका रास्ता कोई ,न मंजिल है
    ‘मोहब्बत है यही’ सबने कहा अक्सर............,.सुन्दर भाव

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  4. बेहतरीन ग़ज़ल .... सादर बधाई

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  5. आपकी सर्वोत्तम रचना को हमने गुरुवार, ६ जून, २०१३ की हलचल - अनमोल वचन पर लिंक कर स्थान दिया है | आप भी आमंत्रित हैं | पधारें और वीरवार की हलचल का आनंद उठायें | हमारी हलचल की गरिमा बढ़ाएं | आभार

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  6. बहुत सुंदर रचना ..

    चलो इतना ही काफ़ी है कि वो हमसे
    मिला कुछ पल मगर मिलता रहा अक्सर

    बहुत बढिया..

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  7. चलो इतना ही काफ़ी है कि वो हमसे
    मिला कुछ पल मगर मिलता रहा अक्सर

    ...बहुत ख़ूबसूरत रचना...

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  8. बेहतरीन ग़ज़ल ...बहुत सुन्दर

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  9. वाह बहुत बढिया

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  10. वाह वाह !
    बहुत सुन्दर बेहतरीन ग़ज़ल
    हार्दिक शुभकामनायें

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  11. मर्मस्पर्शी भाव सुन्दर शब्दों के साथ..अतिसुंदर

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  12. सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति .

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