Friday, August 23, 2019

अवकाश ....मोनिका जैन ‘पंछी’


वह कुछ जो विचलित कर रहा था 
उसी में शांति का आकाश था मेरे लिए। 

वह कुछ जो अजनबी था 
चिर जुड़ाव का अहसास था मेरे लिए।  

वह कुछ जिसे नकारा जा सकता था 
पर फिर भी कहीं स्वीकार था मेरे लिए।  

वह कुछ जिसे देखना और देखते जाना 
अपना ही साक्षात्कार था मेरे लिए।  

कुछ दिन आत्म अवलोकन के 
मैंने गुजारे थे जिसके तले।  

वह कुछ जो मुझे समझ न पाया (आया)
उसे समझना ही अवकाश था मेरे लिए। 
-मोनिका जैन ‘पंछी’

6 comments:

  1. बहुत बढ़‍िया ल‍िखा मोनिका जी

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  2. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (24-08-2019) को "बंसी की झंकार" (चर्चा अंक- 3437) पर भी होगी।


    --

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

    आप भी सादर आमंत्रित है

    ….

    अनीता सैनी

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  3. बहुत सुन्दर..
    वाह!!!

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