Thursday, January 11, 2018

अलाव....प्रतिमा भारती


हर तरह कर ली कोशिश
कि गुज़र जाए रात......
फिर भी ज़रूरत पड़ ही गयी
बुझती यादों के सायों की।
इन्हीं को जला के अलाव
की कोशिश
कुछ गरमाहट दें एहसासों को
कि नई किरण के साथ 
जग जाएँ रिश्ते ....
नई सुबह के लिए।।

-प्रतिमा भारती

5 comments:

  1. सुंदर ख्याल।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (12-01-2018) को "कुहरा चारों ओर" (चर्चा अंक-2846) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. बहुत सुन्दर ..

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