Wednesday, December 12, 2018

सुबह की पलकों पे शबनमी क़तरे ...........श्वेता सिन्हा

दो दिन का इश्क़
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मेरी तन्हाइयों में 
 तुम्हारा एहसास 
कसमसाता है, 
तुम धड़कनों में 
लिपटे हो 
मेरी साँसें बनकर।
बेचैन वीरान 
साहिल पे बिखरा 
कोई ख़्वाब,
लहर समुन्दर की 
पलकों को 
नमकीन करे। 

सोचा न सोचूँ तुम्हें 
ज़ोर  ख़्यालों  पर 
 कैसे हो,
तुम फूल की ख़ुशबू 
 भँवर मन 
मेरा बहकता है। 

दो दिन का 
तेरा इश्क़ सनम 
दर्द ज़िंदगीभर का,
फ़लसफ़ा  
मोहब्बत का 
समझ न आया हमको।

शिशिर 
रात की आग़ोश  में  
संग चाँदनी के  
ख़ूब रोया दिल,
सुबह की पलकों पे 
शबनमी क़तरे 
 गवाही देते। 

-श्वेता सिन्हा

4 comments:

  1. वाह बहुत सुंदर

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 13.12,18 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3184 में दिया जाएगा

    धन्यवाद

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  3. तुम फूल की ख़ुशबू
    भँवर मन
    मेरा बहकता है ....""

    वाह वाह बहुत ही सुन्दर पंक्तियां आदरणीया श्वेता जी
    👏👏✍✍💐💐

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