Sunday, April 8, 2018

चार हाइकु......सविता अग्रवाल ’सवि’

चार हाइकु

1.
आतुर पक्षी
हवा सूँघते सारे
चोंच निकाले

2.
लाली शाखा की
दे रही है संदेसा
नई ऋतु का

3.
शब्द सौंदर्य
सरसता बेजोड़
अनूठा शोध

 4.
हिन्दी का लेख
लेखन शिखर का
करे झंकृत
-सविता अग्रवाल ’सवि’

6 comments:

  1. वाह बहुत सुन्दर।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (09-04-2018) को ) "अस्तित्व बचाना है" (चर्चा अंक-2935) पर होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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  3. बहुत सुन्दर .... लाजवाब !!!

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