Monday, April 23, 2018

कोई अर्थ नहीं......राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह दिनकर

नित जीवन के संघर्षों से
जब टूट चुका हो अन्तर्मन,
तब सुख के मिले समन्दर का
*रह जाता कोई अर्थ नहीं*।।

जब फसल सूख कर जल के बिन
तिनका -तिनका बन गिर जाये,
फिर होने वाली वर्षा का
रह जाता कोई अर्थ नहीं।।

सम्बन्ध कोई भी हों लेकिन
यदि दुःख में साथ न दें अपना,
फिर सुख में उन सम्बन्धों का
रह जाता कोई अर्थ नहीं।।

छोटी-छोटी खुशियों के क्षण
निकले जाते हैं रोज़ जहाँ, 
फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का
रह जाता कोई अर्थ नहीं।।

मन कटुवाणी से आहत हो 
भीतर तक छलनी हो जाये,
फिर बाद कहे प्रिय वचनों का
रह जाता कोई अर्थ नहीं।।

सुख-साधन चाहे जितने हों
पर काया रोगों का घर हो,
     फिर उन अगनित सुविधाओं का
रह जाता कोई अर्थ नहीं।।
-राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह दिनकर

12 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (24-04-2017) को "दुष्‍कर्मियों के लिए फांसी का प्रावधान हो ही गया" (चर्चा अंक-2950) (चर्चा अंक-2947) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. Please read my comment below. And people like you who are in such a responsible position should device ways to stop this plagiarising.Thanks. Suddenly Hindi fonts nahee likh paa rahoon, kshma!

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    2. Stealing somebody's work and posting it in your name or in the name of Rashtrkavi is plagiarism and copy right violation. This is my sister's poem. There are many people who have stolen her work including you. One Ms Sahay has removed her page after reading my blog below. My blog includes many links (including yours) who have shamelessly posted my sister's work in their name. I will keep bugging you untill you acknowledge her properly or remove this poem. My naive sister has removed all her excellent work from the internet and is not ready to share anything on the internet because of the people like you.

      https://shradzzblog.wordpress.com

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  2. वाह बेहद उम्दा 👌

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  3. दिनकर जी की कविताएँ सदा सरल और सहजता से उपदेशात्मक होती थी नमन!!
    सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या हुआ।
    शानदार ।

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  4. महाकवि दिनकर जी कवियों के कवि राज
    लेखन उनका अति उज्वल सा हिय की बात कह जाये !
    अति आभार सखी यशोदा जी दिनकर जी के काव्य से रूबरू करवाया .....शुक्रिया 🙏

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  5. वाह!!! बहुत खूब ... नमन आप की लेखनी को।

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  6. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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    1. Please read my comment below. And people like you who are in such a responsible position should device ways to stop this plagiarising.Thanks. Suddenly Hindi fonts nahee likh paa rahoon, kshma!

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  7. आप मेरी नीचे लिखी बात को कितना सच मानते हैं:
    एक बहुत सुन्दर कविता है किसी ऐसे कवि की , जिसका नाम भी हमने नहीं सुना है आज से पहले | हम पढ़ते हैं सराहते हैं और भूल से जाते हैं !

    वही कविता हम पहली बार पढ़ रहे हैं , पर कविता का श्रेय दिया गया है : राष्ट्र कवि दिनकर जी को ! इस बार वह कविता हमें अत्यधिक पसंद आती है और हम उसकी शैली में दिनकर जी की छवि ढूंढने लग जाते हैं , वाह वाह करते और दिनकर जी के गुणों का बखान करते थकते नहीं हैं !

    मुझे जवाब नहीं चाहिए , क्योंकि ऊपर के Comments में मुझे जवाब मिल गया है ! आप लोगों को जोर का झटका जोर से ही लगेगा जब में यह बताऊँगा की उपरोक्त कविता दिनकर जी की नहीं वरन एक बहुत प्रतिभाशाली कवी सुमति शर्मा जी की है !

    वैसे तो यह बड़ी हौसला बढ़ाने वाली बात हो सकती है किसी के भी लिए की उसकी रचना को इतने बड़े कवि की समझी जाये, पर यदि मैं स्वयं को उनकी जगह रखूँ तो मन खिन्नता से भर जाता है कि मेरे श्रम को किसी और का बताया जा रहा है ! सोशल मीडिआ का तो अब ये हाल है कि लोग बेहिचक किसी भी अच्छी रचना को कर देते हैं ! वो तनिक भी नहीं सोचते की मूल लेखक/कवि पर क्या बीत रही है | मेरा यह मानना है कि हमें किसी भी रचना को साझा करने के पूर्व पूरी जानकारी लेकर ही उसे पोस्ट करना चाहिए !

    यहाँ भी मेरा तो यही कहना है की अपने त्रुटि का सुधार करते हुवे पोस्ट पर मूल रचनाकार को श्रेय देना चाहिए | फैसला आपका है ! वैसे मूल रचनाकार को तो मैं यही सलाह दूंगा की ऐसे 'अतिक्रमण' के खिलाफ शिकायत दर्ज करानी चाहिए यदि उन्हें उचित श्रेय नहीं मिल रहा है तो !

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