Tuesday, April 3, 2018

ऊँचा पहुँचोगे तुम.....मंजूषा "मन"

पंख फैलाओ अगर पास आसमान रहे।
ऊँचा पहुँचोगे तुम साथ गर उड़ान रहे।

मखौल मेरा बनाओ तो बना लो लेकिन,
तीर मुझपर चलाओ तो चला लो लेकिन।
कुछ तो ऐसा करो पास में ईमान रहे॥

हर एक पल उसे बस बात इक सताती है,
चैन की नींद भी तो एक पल न आती है।
घर में जब उसके बेटी कोई जवान रहे॥

अब जो गुज़रे तो फिर न लौट पायेंगे हम,
हमें यक़ीं है उस वक़्त याद आएँगे हम।
उम्र के दौर में जब आपके ढलान रहे॥

एक औरत सँवार देती है दुनिया सारी,
ज़िन्दगी लगने लगे जैसे बगिया प्यारी।
घर वो हो जाये जो पास इक मकान रहे॥

पंख फैलाओ अगर पास आसमान रहे।
ऊँचा पहुँचोगे तुम साथ गर उड़ान रहे॥
-मंजूषा "मन"

12 comments:

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    1. हार्दिक आभार सुशील जी

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (04-04-2018) को ) "रहने दो सम्बन्ध" (चर्चा अंक-2930) पर होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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    1. हार्दिक आभार आपका राधा जी

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  3. बेहतरीन रचना

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    1. हार्दिक आभार नीतू जी

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  4. हौसलों की उड़ान कोई नहीं रोक सकता
    बहुत सुन्दर

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    1. हार्दिक आभार कविता जी

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  5. बहुत सुन्दर....

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    1. बहुत बहुत आभार सुधा जी

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  6. वाह!!बहुत सुंंदर ।

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    1. बहुत बहुत आभार शुभा जी

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