Friday, October 3, 2014

साठ बरस........ केदारनाथ सिंह

 













पिछले साठ बरसों से
एक सुई और तागे के बीच
दबी हुई है मां
हालांकि वह खुद एक
करघा है
जिस पर साठ बरस बुने
गए हैं
धीरे-धीरे तह पर तह
खूब मोटे और गझिन और
खुरदरे
साठ बरस

-केदारनाथ सिंह
.... नायिका से


4 comments:

  1. बहुत ही रहिस्य से भरी पँक्तिया
    आपका ब्लॉगसफर आपका ब्लॉग ऍग्रीगेटरपर लगाया गया हैँ । यहाँ पधारै

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  2. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति

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