Tuesday, October 21, 2014

अक्स तुम्हारा............राजेन्द्र जोशी





 










मैं उस रात
तम्हारे इन्तजार में
घर की छत पर
आधे चाँद को देखता रहा
तुम्हारी तलाश में
देखता रहा
उस आधे में भी
पूरा अक्स तुम्हारा..


-राजेन्द्र जोशी


.... हेल्थ, पत्रिका से





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