Tuesday, October 8, 2013



चांद तारों को भी तस्खीर तो करते रहिये
बन्दगी की है ये मेराज कि नीचे रहिये

आगे बढ़ने की ये जिद, जान भी ले सकती है
शाह्जादे यही बेहतर है कि पीछे रहिये

जो भी होना है वही ज़िल्ले-इलाही होगा
आप क्यूं फिक्र करें, आप तो पीते रहिये

है बगावत यहाँ कद अपना बढ़ाने का ख्याल
सिर्फ साये में बड़े लोगों के जीते रहिये

एक से हाथ मिलाया तो मिलाएंगे सभी
भीड़ में हाथ को अपने अभी खींचे रहिये

रास्तो! क्या हे वोह लोग जो आते जाते
मेरे आदाब पे कहते थे कि जीते रहिये

अज्मत-ए-बखियागिरी इस में है 'अजहर साहब'
दूसरे चाक गिरेबान भी सीते रहिये

अजहर इनायती

4 comments:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  2. Shahzado ko tehzeeb ki training raj-nartakis aur chaploos vazir hi dete hain.

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  3. वाह वाह - बहुत खूब

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  4. सुन्दर प्रस्तुति ....
    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें

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