Sunday, October 28, 2012

प्रेम का मतलब तुम...............रविकांत






प्रेम-1 
प्रेम का मतलब है
तुम्हारे साथ रहना। 



 

प्रेम-2
तुम मुझे माफ नहीं करती
पर सारे अपमान पी कर भी
मैं तुम्हें मना लेता हूं।

हालांकि तुम कहती हो कि
इसका उल्टा ही सच है।

मैं बांहें फैलाकर
जरा-सा मुस्करा देता हूं।

प्रेम-3
तुम्हारे खिलाफ सुनी बहुत सी बातों पर
मुझे यकीन भी है।
पर उनकी चर्चा मैं तुमसे
कभी भी नहीं करूंगा।

पता नहीं ये बात
मेरे जेहन में है
या
तुम्हारे। 


--रविकांत

7 comments:

  1. कितने रंग लिए ,कितने विचार लिए प्रेम ....

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  2. क्या बात है -
    खुबसूरत प्रस्तुति |
    आभार ||

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  3. प्रेम की अलग अलग परिभाषा

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  4. बहुत सुन्दर .बहुत खूब,बेह्तरीन अभिव्यक्ति

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