Saturday, May 27, 2017

इतिहास में आज: 27 मई..ताना-बाना

27 मई 1964 को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आखिरी सांस ली. नेहरू को आधुनिक भारत का निर्माता माना जाता है.


जवाहरलाल नेहरू का निधन अचानक ही हुआ. नेहरू पहाड़ों पर छुट्टियां बिता कर लौटे थे. नई दिल्ली में उन्हें सुबह सीने में दर्द की शिकायत हुई. डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें नहीं बचाया जा सका. निधन के वक्त नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी सिराहने पर मौजूद थी. नेहरू के निधन की जानकारी केंद्रीय मंत्री सी सुब्रमणियम ने सार्वजनिक की. राज्य सभा में रुआंसे गले से उन्होंने कहा, "प्रकाश नहीं रहा."
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के धुर आलोचक भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि वे महान लोकतांत्रिक मूल्यों वाले नेता थे. नेहरू ने तमाम मुश्किलें उठाकर धर्मनिरपेक्ष ढांचे की नींव रखी और उसकी पूरी शक्ति से हिफाजत भी की. संसद में आलोचना करने वालों की भी वो पीठ थपाया करते थे.
नेहरू के करिश्माई नेतृत्व के कायल दुनिया भर के कई नेता रहे. इन्हीं में से एक थे सोवियत संघ के पूर्व राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचोव. गोर्बाचोव जब छात्र थे, तब वो कॉलेज बंक कर नेहरू का भाषण सुनने गए. मिखाइल गोर्बाचोव ने ही पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के एकीकरण में निर्णायक भूमिका निभाई.
अमेरिका और सोवियत संघ के बीच छिड़े शीत युद्ध के कारण नेहरू ने गुट निरपेक्ष आंदोलन की भी शुरुआत की. वो चाहते थे कि दुनिया लोकतांत्रिक रहे, दो ध्रुवों में न बंट जाए. नेहरू के कार्यकाल में भारत में अच्छी शिक्षा वाले कॉलेज खुले. गांवों और कस्बों के विकास में स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए पॉलीटेक्निक, आईआईटी और आईआईएम जैसे कॉलेज खोले गए.

कई विश्लेषकों के मुताबिक नेहरू ने वह कर दिखाया जो पाकिस्तान में मोहम्मद अली जिन्ना नहीं कर सके. नेहरू ने भारत को किसी दूसरे देश पर निर्भर होने के बजाए अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास दिया.



4 comments:

  1. सही कहा. नेहरूजी को श्रधांजलि.

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (28-05-2017) को
    "इनकी किस्मत कौन सँवारे" (चर्चा अंक-2635)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  3. आज सलिल वर्मा जी ले कर आयें हैं ब्लॉग बुलेटिन की १७०० वीं पोस्ट ... तो पढ़ना न भूलें ...

    ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " अरे दीवानों - मुझे पहचानो : १७०० वीं ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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