Friday, April 4, 2014

...... पर जीतकर भी हार गया ......यशोदा


मध्य प्रदेश में हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के दौरान
6 लाख 43 हजार 144 मतदाताओं ने 
ईवीएम और डाक मतपत्र में नोटा 
यानी 'इनमें से कोई नहीं' का इस्तेमाल किया।
इनमें डाक मतपत्र में 2633 तथा ईवीएम पर 6 लाख 40 हजार 511 
नोटा का उपयोग हुआ।
अकेले मध्य प्रदेश का ये हाल है तो बाकी और राज्यों के भी 
विधान सभाओं के चुनावों में भी कमो-बेस यही हाल होगा
कुछ अनछुए प्रश्न??
नोटा क्यों ??
नोटा का क्या औचित्य है ??
एक परिकल्पना..........
एक निर्वाचन क्षेत्र में 10 लाख मतदाता हैं और विभिन्न दलों को मिलाकर 9 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं....चुनाव हुए कुल मत पड़े 67 प्रतिशत यानि 6 लाख 70 हजार मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया पर.......
कुल जमा 1लाख 50हजार मतदाताओं ने 
अपनी जागरूकता का परिचय देते हुए नोटा का बटन दबाया....
वही हुआ जो होना था एक प्रत्याशी विजयी हुआ उसे 95 हजार मत मिले...
है न आश्चर्य.......
वास्तव में जीता तो नोटा...... पर जीतकर भी हार गया
आपसे अनुरोध....कृपया नोटा का उपयोग न करें
सही उम्मीदवार को अपना मत (वोट) प्रदान करें

अब यह प्रश्न आपकी अदालत में....
नोटा की क्या उपयोगिता है......
-यशोदा

9 comments:

  1. अगर उपयोगिता नहीं है तो फिर ये प्रयोग ही क्यों किया गया है ये भी एक ज्वलंत प्रश्न है नहीं है क्या? क्या चंद लोगों के द्वारा थोपे गये उम्मीदवारों को योग्य मान लिया जाये ? मतलब चूज द लैसर इविल :) बहस तो होनी ही चाहिये ।

    ReplyDelete
  2. सही कहा दीदी। नोटा आज की तारीख मे आधारहीन है।


    सादर

    ReplyDelete
  3. NOTA का प्राविधान सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर चुनाव आयोग द्वारा किया गया है। जिन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में इसके पक्ष में दलीलें दी होंगी उनके अपने कुछ निहित स्वार्थ रहे होंगे। परंतु 'स्वस्थ-लोकतन्त्र' के लिए यह व्यवस्था और भी ज़्यादा घातक है जैसा कि प्रस्तुत उदाहरणों से सिद्ध होता है। कुछ सरकारी कर्मचारियों के संगठन व कुछ राजनीतिक दल अधिकाधिक 'नोटा' प्रयोग का प्रचार कर रहे हैं इससे तो और भी कम लोकप्रिय व्यक्ति के चुने जाने के खतरे बढ़ रहे हैं। जो लोग किसी भी उम्मीदवार को योग्य नहीं समझते हैं वे खुद पहल करके आगे क्यों नहीं आते हैं। अपने कर्तव्यों का पालन न करने वाले लोग ही 'नोटा' का प्रयोग अथवा चुनाव बहिष्कार की अपीलें करते हैं जो कि 'संसदीय लोकतन्त्र' के लिए घातक है व ऐसा करना एक निरंकुश तानाशाही का ही मार्ग प्रशस्त करेगा।

    ReplyDelete
    Replies
    1. विजय भैय्या
      मैं भी आपसे सहमत हूँ
      सादर

      Delete
  4. NOTA, recall of candidate- these are some ideas of the anarchist groups. These mean nothing. Vote is to elect and not reject.

    ReplyDelete
  5. यह एक गम्भीर चर्चा का विषय है कि आखिर क्यों सर्वोच्च न्यायालय ने नोटा लागू क्यों किया। यह तो एक तरह से चुनाव का बहिष्कार की नीति है।
    हर एक एक चुनाव में एक निर्वाचन जगह से कम से कम 15 - 20 उम्मीदवार तो खड़े होते ही है और ऐसा नहीं हो सकता की सारे के सारे ही गलत या भ्रष्ट उम्मीदवार होंगे।
    इस प्रणाली से तो मतों का दुरूपयोग ही होगा।

    ReplyDelete
  6. NOTA ki utility aane wale samay mein pataa chalegi .. aaj bhale hi ham ise nakaar dein par aaj ke waqt mein jab rajniti ka standard behad neeche jaa rahaa hai tab ye NOTA hi hai jo politicians ke liye ek alert siren ka kaam karega .. mera opinion yahi hai ki NOTA jaari rahnaa chahiye .. ham ek democracy hain .. har insaan ko apni pasand bataane ka adhikaar hai aur NOTA isi ka parteek hai

    ReplyDelete
  7. bilkul sahi baat kahi hai aapne

    shbuhkamnayen

    ReplyDelete