Saturday, March 29, 2014

जीवन की पगडण्डियां.................सौरभ श्री



अमित पद-चिन्ह संकलन
टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडियां


जड़ सही, जीवन्त फिर भी
मिलन-विरह पगडंडियां


कहीं सहज, कहीं दुर्गम
सोच-दुविधा पगडंडियां


ऊबड़-खाबड़, फेर-घुमाव
पग जीवनी पगडंडियां


कभी हलचल-कभी वीरान
मौन-उत्सव पगडंडियां


प्रातः उत्साह, कदम चलती
सांझ थके पांव, पगडंडियां


धूल-धूसरित विस्तार
लघु पथ पगडंडियां


स्वप्न-शोक गुजरें पग
स्थिर पगडंडियां


सिर झुकाए देखता हूँ
जीवन पगडंडियां
-सौरभ श्री

(रसरंग से)

1 comment:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शनिवार (29-03-2014) को "कोई तो" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1566 "अद्यतन लिंक" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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