Friday, June 22, 2018

रहम मेरे यार कर.......श्वेता

मैं ख़्वाब हूँ मुझे ख़्वाब में ही प्यार कर
पलकों की दुनिया में जी भर दीदार कर

न देख मेरे दर्द ऐसे बेपर्दा हो जाऊँगी
न गिन जख़्म दिल के,रहम मेरे यार कर

बेअदब सही वो क़द्रदान है आपके 
न तंज की सान पर लफ़्ज़ों को धार कर

और कितनी दूर जाने आख़िरी मुक़ाम है
छोड़ दे न साँस साथ कंटकों से हार कर

चूस कर लहू बदन से कहते हो बीमार हूँ
 ज़िंदा ख़ुद को कहते हो,ज़मीर अपने मारकर
-श्वेता सिन्हा

8 comments:

  1. आफरीन श्वेता जी ...बेअदब ही सही वो कद्रदान है आपके .....क्या फलसफा पकड़ा है ....बहुत खूब
    हर शेर मैं तंज है हर लफ्ज में धार
    कट जाये पत्थर का जिगर अहसास है तेज कटार

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  2. प्रिय श्वेता जी ......
    इश्क इश्क है सुन सखी खाला का घर नाय
    रहम कहा इस प्यार मैं घायल दिल करि जाय

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (23-06-2018) को "करना ऐसा प्यार" (चर्चा अंक-3010) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. बेहतरीन,शानदार

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  4. मैं ख़्वाब हूँ मुझे ख़्वाब में ही प्यार कर
    पलकों की दुनिया में जी भर दीदार कर-------
    वाह और सिर्फ वाह प्रिय श्वेता !!!!! लगता है मेरी बहन का नाम अब उर्दू अदब में बहुत चमकने वाला है | रचना जानलेवा है !!!! शुभकामनाओं के साथ मेरा बहुत प्यार |

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  5. बहुत सुन्दर

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  6. बहुत ही खूबसूरत

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