Sunday, June 10, 2018

दर्द.........विजय कुमार सप्पत्ति

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जो दर्द तुमने मुझे दिए,
वो अब तक सँभाले हुए हैं !!
कुछ तेरी ख़ुशियाँ बन गई हैं 
कुछ मेरे ग़म बन गए हैं 
कुछ तेरी ज़िंदगी बन गए हैं 
कुछ मेरी मौत बन गए हैं 
जो दर्द तुमने मुझे दिए,
वो अब तक सँभाले हुए हैं !!
-विजय कुमार सप्पत्ति

4 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (11-06-2018) को "रखना कभी न खोट" (चर्चा अंक-2998) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, ८ जून को मनाया गया समुद्र दिवस “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. येे कविता है Vijay Kumar Sappatti ji
    की, जो अब हमसब के बीच नहीं है...उन्‍होंने अपनी अंतिम फेसबुक पोस्‍ट 26 फरवरी को डाली थी

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