Wednesday, November 19, 2014

छोटी सी मुलाकात काफी है...............जितेन्द्र "सुकुमार"


सोचने के लिए इक रात काफी है
जीने, चंद शाद-ए-हयात काफी है

यारो उनके दीदार के लिए देखना
बस इक छोटी सी मुलाकात काफी है

उनकी उलझन की शक्‍ल क्या है
कहने के लिए जज्‍ब़ात काफी है

बदलते इंसान की नियति में
यहॉ छोटा सा हालात काफी है

न दिखाओं आसमां अपना दिल
तुम्हारे अश्कों की बरसात काफी है

खुद को छुपाने के लिए 'सुकुमार'
चश्म की कायनात काफी है

-जितेन्द्र "सुकुमार"


' उदय आशियाना ' चौबेबांधा राजिम जिला- गरियाबंद, (छग.) - 493 885

4 comments:

  1. सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बधाई ! आदरणीय सुकुमार जी!
    धरती की गोद

    ReplyDelete
  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 20-11-2014 को चर्चा मंच पर तमाचा है आदमियत के मुँह पर { चर्चा - 1803 } में दिया गया है
    आभार

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर गजल हर शब्द अनूठे हैं

    ReplyDelete