Thursday, August 30, 2012

बाहों में हो फूल सदा..............शिखा वर्मा

माना कि बाहों में हो फूल सदा ,
ये जरूरी तो नही ।
काँटों का दर्द भी ,
कभी तो सहना होगा।
राहों में छाव हो सदा,
ये जरूरी तो नहीं।
धुप की चुभन में,
कभी तो रहना होगा ।
हंसी खिलती रहे सदा ,
ये जरूरी तो नहीं।
पलकों पर जमे अश्को को,
कभी तो बहना होगा।
हर पल रहे खुशनुमा सदा,
ये जरूरी तो नहीं,
थम सी गयी है जिन्दगी,
कभी तो कहना होगा।
पर तुम्हें 
खुश रहने की कोशिश तो करना होगा |

-शिखा वर्मा
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19 comments:

  1. हर पल रहे खुशनुमा सदा,
    ये जरूरी तो नहीं....
    जरूरी तो सिर्फ ये है कि...
    एहसास बिखेरता रहे ये मन-प्राण
    जैसा आपने बिखेरा अपने शब्दों में
    बाकी सब दिखावा... बाहर का छलावा
    ---------------------------------
    बहुत अच्छा लिखा आपने....हमारी बधाई...

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    1. शुक्रिया राहुल

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  2. हर पल रहे खुशनुमा सदा,
    ये जरूरी तो नहीं....
    इतनी सुन्दर कविता के लिये चार पंतियां समर्पित हैं।
    भाषा सरल,सहज यह कविता,
    भावाव्यक्ति है अति सुन्दर।
    यह सच है सबके यौवन में,
    ऐसी कविता सबके अन्दर।
    कब लिख जाती कैसे लिखती,
    हमें न मालुम होता अकसर।

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    1. धन्यवाद मदन भाई

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  3. अतिसुंदर...
    बड़ी सरलता व सहजता से लिखी हुई ये पंक्तियाँ|

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  4. शुभप्रभात छोटी बहना :)
    थम सी गयी है जिन्दगी,
    कभी तो कहना होगा।
    पर तुम्हें
    खुश रहने की कोशिश तो करना होगा |
    हर पल रहे खुशनुमा सदा,
    ये जरूरी तो नहीं !

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    1. दीदी प्रणाम
      धन्यवाद दीदी

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  5. जीवन के संग -संग बहना होगा ,जीवन हंसी भी जीवन रुदन भी ,जीवन ख़ुशी भी जीवन घुटन भी ,जो न जीवन की गत पर गाये ,उसे नहीं जीने का हक़ है ...का फलसफा आपने समझा दिया ,बढिया रचना .बढ़िया बहुत बढ़िया हलचल नै भी पुरानी भी ....
    ram ram bhai
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    1. दीदी प्रणाम
      मेरी पसंद आपको अच्छी लगी
      धन्यवाद दीदी

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  7. Replies
    1. शुक्रिया अजय भाई

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  8. सुन्दर कविता

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  9. sach kaha kosish jaruri hai khush rehne ki....

    sundar:-)

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  10. हर पल रहे खुशनुमा सदा,
    ये जरूरी तो नहीं,
    थम सी गयी है जिन्दगी,
    कभी तो कहना होगा।
    पर तुम्हें
    खुश रहने की कोशिश तो करना होगा |

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  11. Dharti lok ke arambh se hi Dvait her zindagi ka atoot ang he. Nishkam reh ke zindagi jo kata kre ; khush rhe herdum jub sub me khushi bantta kre .

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