उसे होठों पे लाओ तो कोई बात बने
ख्वाब रोज़ रातों को देखा करते हो
कभी हकीकत में आओ तो कोई बात बने
यूं तो धरती पर सदियों से रहते हैं हम
तुम आसमां छू के दिखाओ तो कोई बात बने
फूलों की खुशबू में खोये रहते हो रात दिन
कभी काँटों में मुस्कुराओ तो कोई बात बने
फूलों की खुशबू में खोये रहते हो रात दिन
कभी काँटों में मुस्कुराओ तो कोई बात बने
मुझे यकीं है तुम मंजिल को पा लोगे एक दिन
एक राह मुझको भी दिखाओ तो कोई बात बने
यूं तो एहसास है हम सभी को अपने गमों का
गैरों के आँसू अपनी आँख में लाओ तो कोई बात बने
खुद झूठे हो मुझसे वफा की उम्मीद करते हो
कभी दिल के अंधेरे को मिटाओ तो कोई बात बने
ये धर्म ये समाज ये दक़ियानूसी बातें
खुद को इनसे जुदा पाओ तो कोई बात बने
लाख कोशिश के बाद कुछ न कुछ बन जाओगे तुम भी
किसी के दिल में थोड़ी सी जगह पाओ तो कोई बात बने
एक राह मुझको भी दिखाओ तो कोई बात बने
यूं तो एहसास है हम सभी को अपने गमों का
गैरों के आँसू अपनी आँख में लाओ तो कोई बात बने
खुद झूठे हो मुझसे वफा की उम्मीद करते हो
कभी दिल के अंधेरे को मिटाओ तो कोई बात बने
ये धर्म ये समाज ये दक़ियानूसी बातें
खुद को इनसे जुदा पाओ तो कोई बात बने
लाख कोशिश के बाद कुछ न कुछ बन जाओगे तुम भी
किसी के दिल में थोड़ी सी जगह पाओ तो कोई बात बने
-----मनीष गुप्ता






