Sunday, June 28, 2015

मील के पत्थर नहीं होते......सदा










कुछ टूटता है जब भी,

मन अनमना हो

टूटू-फूटे सवाल करता है,

सपनों को वो 

उम्मीद की आँखों में 

पलने नहीं देता 

मुश्किल रास्तों पर

देखना अक़्सर 

मील के पत्थर नहीं होते


... 


एक चिन्ह पहचान का 

घने ज़ंगलों में 

खो जाता है 

अपनी ही आवाज़ 

लौट के आती है बार-बार

कहाँ जाना है, क्या पाना है 

मुसाफि़र एक दिशा तय कर

धैर्य की लाठी ले

मन को हांक लगाता चल 

मुश्किलें आएंगी 

पर तू बढ़ता चल 

-सदा

3 comments:

  1. You are quite right that Hurdles are bound to come , We have to overcome.

    ReplyDelete
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (29-06-2015) को "योग से योगा तक" (चर्चा अंक-2021) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

    ReplyDelete
  3. मुश्किल रास्तों पर


    देखना अक़्सर


    मील के पत्थर नहीं होते


    - ye baat sach hai. Hamari sabse kathin raah, koi ank nahi laati pane saath sahara dene ko.

    ReplyDelete