Friday, January 3, 2014

ख़ौफ़ दिल से उतर गया होता.............आलोक मिश्रा



सर से पानी गुज़र गया होता
ख़ौफ़ दिल से उतर गया होता

तू जो मुझको न भूल पता गर
तू भी मुझसा बिखर गया होता

आजिज़ी कितने काम आती है
सर उठाता तो सर गया होता

मुंतज़िर मेरा जो होता कोई
लौटकर मैं भी घर गया होता

ज़िंदगी हिज्र की बुरी है बहुत
इससे बेहतर था मर गया होता

आलोक मिश्रा 09876789610

 http://wp.me/p2hxFs-1AW

9 comments:

  1. बहुत सुन्दर ...!
    नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाए...!

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  2. बहुत सुन्दर।
    सुप्रभात।
    नववर्ष में...
    स्वस्थ रहो प्रसन्न रहो।
    आपका दिन मंगलमय हो।

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  3. बहुत सुंदर....नव वर्ष मंगलमय हो आपका....
    काफी उम्दा रचना....बधाई...बेहतरीन चित्रण....
    नयी रचना
    "एक नज़रिया"
    आभार

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  4. बहुत सुंदर प्रस्तुति...!साझा करने के लिए आभार ....

    नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाए...!
    RECENT POST -: नये साल का पहला दिन.

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  5. काफी उम्दा प्रस्तुति.....

    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (05-01-2014) को "तकलीफ जिंदगी है...रविवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1483" पर भी रहेगी...!!!

    आपको नव वर्ष की ढेरो-ढेरो शुभकामनाएँ...!!

    - मिश्रा राहुल

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  6. बहुत उम्दा !
    नया वर्ष २०१४ मंगलमय हो |सुख ,शांति ,स्वास्थ्यकर हो |कल्याणकारी हो |

    नई पोस्ट सर्दी का मौसम!
    नई पोस्ट विचित्र प्रकृति

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