Monday, August 30, 2021

काश कि चित्रकार होती ....निधि सक्सेना

काश कि चित्रकार होती
तो इन चरणकमलों को अपनी कूची से उकेरती
यूँ खो जाती इनमें..
काश कि मूर्तिकार होती
तो मूर्ति गढ़ती
यूँ नाता जोड़ती इनसे..
काश कि कवि होती
काव्य रचती
यूँ सुख पाती ..
परन्तु मैं अकिंचन
न रंग न शब्द न छैनी
केवल भावनाएं हैं
वो भी कभी उफनती किलकती
कभी लड़खड़ाती
वही अर्पित करती हूं श्रीहरि
अपने अंक लगाए रखना
तुममें ही डूबूं तिरुं
प्रेम की अलख जगाए रखना...
-निधि सक्सेना

3 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 30 अगस्त 2021 शाम 3.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. कृष्ण जन्माष्टमी की अनंत शुभकामनाएं
    हरि अपने चरणों में जगह देना।
    बहुत सुन्दर भक्ति भाव पूर्ण।

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  3. बहुत सुन्दर भाव ...
    प्रेम करना सब कुछ हो जाना है ... बिना भाव के कुछ नहीं होता ... ये कान्हा जानते हैं और समझ जाते हैं ...

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