Wednesday, September 7, 2016

ये दुनिया किसी के बगैर अधूरी नहीं होती...डॉ. विजय कुमार सुखवानी



इन्सान की हर ख्वाहिश पूरी नहीं होती
हर अर्ज़ी की किस्मत में मंजूरी नहीं होती

कौन कहता है फ़ासले दूरी से होते हैं
फ़ासले वहीं होते हैं जहाँ दूरी नहीं होती

दुनियादारी के फैसले तो ज़ेहन से होते हैं
इनमें दिल की रजामंदी ज़रूरी नहीं होती

बेवफ़ाई कुछ लोगों की फितरत होती है
हर बेवफ़ाई के पीछे मजबूरी नहीं होती

वो लोग नाकाम रहते हैं दुनिया में अक्सर
जिनसे मेहनत तो होती है जीहजूरी नहीं होती

ये भरम है कि हमीं से मुकम्मल है दुनिया
ये दुनिया किसी के बगैर अधूरी नहीं होती
-डॉ. विजय कुमार सुखवानी

7 comments:

  1. बेहद शानदार प्रस्तुति

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 08-09-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2459 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (09-09-2016) को "हिन्दी, हिन्द की आत्मा है" (चर्चा अंक-2460) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. डॉक्टर विजय जी, उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ

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  5. डॉक्टर विजय जी, उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ

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  6. वो लोग नाकाम रहते हैं दुनिया में अक्सर
    जिनसे मेहनत तो होती है जीहजूरी नहीं होती

    ये भरम है कि हमीं से मुकम्मल है दुनिया
    ये दुनिया किसी के बगैर अधूरी नहीं होती
    -डॉ. विजय कुमार सुखवानी--साधू साधू

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