Sunday, April 17, 2016

किसने ऐसा किया इशारा था............डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफ़री


किसने ऐसा किया इशारा था
ख़त मेरा था पता तुम्हारा था

तुम ये कहते हो भूल जाऊँ मैं
तुमने मेरा चेहरा उतारा था

काम आई फिर अपनी ताकत ही
कोई किसका यहां सहारा था

हम अदालत में झूठ कह बैठे
और बाक़ी न कोई चारा था

फिर इकबार तुम तो सुन लेते
मैंनें तुमको अगर पुकारा था

इश्क़ में ये बात अहम ही नहीं
कौन जीता था कौन हारा था

उसको कहते थे लोग सब ज़ालिम
फिर भी बच्चा वो मां को प्यारा था

- डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफ़री
मधुरिमा से...

4 comments:

  1. शानदार है।
    आभार आपका आप मेरे ब्‍लॉग तक आई मैं प्रोत्‍साहित हुआ

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (18-04-2016) को "वामअंग फरकन लगे " (चर्चा अंक-2316) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. इश्क़ में ये बात अहम ही नहीं
    कौन जीता था कौन हारा था

    बहोत खूब।

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