Friday, December 27, 2013

अब एक रोज़ हमेशा के वास्‍ते आ जा..................प्रेम कुमार शर्मा ‘प्रेम’


जहां न कोई हो अपना वहां पै जाना क्‍या
जहां पै कोई हो अपना वहां से आना क्‍या

इसी में उलझा रहेगा भला ज़माना क्‍या
न दूट पायेगा इसका ये खोना पाना क्‍या

तुम्हें है ‍फ़ि‍क्र नशेमन की मुझको गुलशन की
न हो चमन ही सलामत तो आशियाना क्‍या

अब एक रोज़ हमेशा के वास्‍ते आ जा
ये रोज़ रोज़ का इस तरह आना जाना क्‍या

है शुक्र इनका उड़ा लायीं आँधियाँ तिनके
वगरना ‘प्रेम’ बना पाता आशियाना क्‍या

प्रेम कुमार शर्मा ‘प्रेम’ पहाड़पुरी 09352589810

http://wp.me/p2hxFs-1A7

6 comments: