Monday, August 30, 2021

कन्हैया ...पुष्पा कुमारी "पुष्प"

लघुकथा
....
"सुनो!.तुम मुन्ना को कन्हैया बना उसे लेकर जन्माष्टमी के पंडाल में चली जाना।"
अपना मोबाइल और गाड़ी की चाबी उठा वह चलने को हुआ लेकिन पत्नी ने टोक दिया..
"आप किसी जरूरी काम से कहीं जा रहे हैं क्या?"
"मेरे दोस्त ने कॉकटेल पार्टी रखा है!.मैं वहीं जा रहा हूंँ।"
"आपसे एक बात कहनी थी।"
"क्या?"
"मुन्ना ने कन्हैया बनने से इनकार कर दिया है।"
"क्यों? कल ही तो उसके लिए इतना महंगा कन्हैया वाला ड्रेस लाया हूंँ!.उसे वह ड्रेस पसंद नहीं आया क्या?"
"कह रहा है कि,.मैं कन्हैया हो ही नहीं सकता!"
"क्यों नहीं हो सकता?..मेरा राजा बेटा है वो!"
लगभग पांच-छ: वर्ष के अपने इकलौते बेटे की हर ख्वाहिश पूरी करने वाला हैरान हुआ क्योंकि वह कई बार प्यार से उसे कन्हैया ही तो बुलाता था।
"कहता है कि,.कन्हैया तो दूध-छाछ पीने वाले नंद बाबा का पुत्र था!.शराब पीने वाले का नहीं।"
पति पत्नी के बीच कुछ देर के लिए एक गहरा सन्नाटा छा गया और उस सन्नाटे को भंग करते हुए उसने गाड़ी की चाबी वापस रख दी।

-पुष्पा कुमारी "पुष्प"  

काश कि चित्रकार होती ....निधि सक्सेना

काश कि चित्रकार होती
तो इन चरणकमलों को अपनी कूची से उकेरती
यूँ खो जाती इनमें..
काश कि मूर्तिकार होती
तो मूर्ति गढ़ती
यूँ नाता जोड़ती इनसे..
काश कि कवि होती
काव्य रचती
यूँ सुख पाती ..
परन्तु मैं अकिंचन
न रंग न शब्द न छैनी
केवल भावनाएं हैं
वो भी कभी उफनती किलकती
कभी लड़खड़ाती
वही अर्पित करती हूं श्रीहरि
अपने अंक लगाए रखना
तुममें ही डूबूं तिरुं
प्रेम की अलख जगाए रखना...
-निधि सक्सेना

Tuesday, August 24, 2021

गांधारी के श्राप के कारण अफगानिस्तान का हुआ है ये हाल, इतिहास दे रहा है इस बात की गवाही

 गांधारी के श्राप के कारण अफगानिस्तान का हुआ है ये हाल,
इतिहास दे रहा है इस बात की गवाही



अफगानिस्तान पर अब तालिबान का कब्जा हो चुका है. अफगानिस्तान में चारो तरफ खून खराबा और हाहाकार मचा हुआ है. तालिबान अब अपना असली चेहरा दिखा रहा है. उसकी क्रूरता बढ़ती जा रही है. दूसरे देश और खुद अफगानिस्तान के लोग अब वहां एक पल भी रहना नहीं चाहते हैं. अफगानिस्तान में तालिबान का ये आतंक देख गांधारी का वो श्राप याद आ रहा है, जो उन्होंने अपने भाई शकुनी को दिया था. इस समय गांधारी के उस श्राप की फिर से चर्चा बढ़ गई है. तो चलिए हम आपको बताते हैं क्या है गांधारी से भारत का कनेक्शन और क्या था गांधारी का श्राप.

महाभारत काल के श्राप की वजह से जल रहा है अफगानिस्तान

महाभारत की प्रभावशाली महिला पात्रों जब बात आती है तो उसमें गांधारी का नाम भी लिया जाता है. गांधारी हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र की पत्नी और दुर्योधन की मां थी. शकुनि गांधारी का भाई था. गांधारी का संबंध गांधार से था जिसे आज कंधार कहा जाता है. जो अफगानिस्तान में स्थित है. गांधारी के पिता का नाम सुबल था. गांधार राज्य से संबंध होने के कारण ही गांधारी कहा जाता था. राजा धृतराष्ट्र के अंधे होने के कारण विवाहोपरांत ही गांधारी ने भी आंखों पर पट्टी बांध ली थी. गांधारी पतिव्रता स्त्री थीं.
महाभारत के युद्ध में कौरवों की पराजय हुई थी. महाभारत के युद्ध में गांधारी के सभी 100 पुत्रों की मृत्यु हो गई थीं. महाभारत का युद्ध जब समाप्त हुआ है और महल में जब गांधारी ने अपने सभी पुत्रों के शवों को देखा तो वह क्रोध में आ गईं. गांधारी ने शकुनि को श्राप दिया था कि जिस तरह से तुमने मेरे 100 पुत्रों को मरवा दिया उसी तरह से तुम्हारे देश में कभी शांति नहीं होगी.

गांधारी ने दिया था शकुनी और गांधार को श्राप

आपकों बता दें कि कहा जाता है कि भीष्म ने गांधारी से धृतराष्ट्र की शादी के लिए सुबल के परिवार को नष्ट कर दिया था, जब पिता की मृत्यु के बाद शकुनी राजा बना तो उसने भीष्म के परिवार से बदला लेने के लिए चाल चली और कौरवों और पांडवों के बीच महाभारत का युद्ध कराया, जिसमे भीष्म सहित उनका पूरा परिवार नष्ट हो गया और सिर्फ पांडव ही जीवित बचे, ऐसे में गांधारी ने शकुनी को श्राप दिया कि “मेरे 100 पुत्रो को मरवाने वाले गांधार नरेश तुम्हारे राज्य में कभी भी शांति नहीं रहेगी.”

Monday, April 5, 2021

जो एक डोर से बंधे है ...सुरेन्द्रनाथ कपूर


क्या चाहता है मन ?
क्यों इतना उदास है?
वह मिल के नहीं मिलते
जिनसे 
मिलने की प्यास है!
अपने को खोजता है 
किसी और की छाया में
रहता है खुद से दूर
मगर  गैरों के पास है!
खुशियों के सारे पल
इसी
वहशत में गुज़र जाते है
साध अधूरी रहने का सोग
हम रोज़ ही मनाते हैं!
इतना 
समझना काफी है
जो भी होता है
आकस्मिक नहीं ,
निर्धारित है।
हर चीज़ का  समय है
किसी सूत्र से 
संचालित है।
मौसम भी रंग बदलते हैं
चाँद सूरज भी 
रोज़ ढलते हैं
कुछ लोग चले जाते हैं
कुछ मीत नए मिलते है!
जो बेगाने है 
तुम्हारे थे ही नहीं,
खुद ही चले जायेंगे।
जो
एक डोर से बंधे है
वह
जाकर भी लौट आयेगे।
अपना चाहा
हो जाये तो बहुत अच्छा,
न हो ,तो उससे बेहतर।
शाश्वत सत्य है,
यकीन कर लो तो सोना है
वर्ना  गर्द से भी बदतर!
- सुरेन्द्रनाथ कपूर


Friday, February 12, 2021

मै भारत-भूमि ! ...मंजू मिश्रा

मै भारत-भूमि !
ना जाने कब से
ढूंढ रही हूँ
अपने हिस्से की
रोशनी का टुकड़ा….
लेकिन पता नहीं क्यो
भ्रष्ट अवव्यस्था के ये अँधेरे
इतने गहरे हैं
कि फ़िर फ़िर टकरा जाती हूँ
अंधी गुफा की दीवारों से…
बाहर निकल ही नहीं पाती
इन जंजीरों से,
जिसमे मुझे जकड़ कर रखा है
मेरी ही संतानों ने

उन संतानों ने
जिनके पूर्वजों ने
लगा दी थी
जान की बाज़ी
मेरी आत्मा को
विदेशियों की चंगुल से
मुक्त कराने के लिए

हँसते हँसते
खेल गए जान पर
शहीद हो गये
माँ की आन पर
एक वो थे
जिनके लिए
देश सब कुछ था
देश की आजादी
सबसे बड़ी थी
एक ये हैं
जिनके लिए
देश कुछ भी नहीं
देश का मान सम्मान
कुछ भी नहीं
बस कुछ है तो
अपना स्वार्थ,
अपनी सम्पन्नता और
अपनी सत्ता ……

-मंजू मिश्रा


Thursday, February 11, 2021

मैं अदना नारी .....नीलम गुप्ता

मैं अदना नारी
सब कहते है कैसे लिख लेती हो
कितना हुनर है
मैं मुस्करा जाती हूं
और तुम्हें एक राज बताती हूं
लिखने को हुनर नही दिल चाहिए
शब्द नही समझ चाहिए
कोई कहानी नहीं
बस दर्द चाहिएं
कोई बनावट नही
असलियत चाहिएं

कौन क्या लिखता
कैसे लिखता
मैं नही जानती
बस दिल ने जो कहा
मैं बस वहीं  मानती 

कोई जादू नहीं है ये
ना कोई काबिलियत हैं ये
बस जज्बात से भरा दिल हैं
जिसे आपके समझ में उभारती
बिना जज्बात के बात नहीं बनती
बात बिन कायनात नही रचती

फिर मैं तो कलमकार हूं दोस्तों
जज्बात बिन मेरी
कलम भी ना हिलती
कुछ अनकहे ख्याब
कुछ सबके विचार
कुछ नादानियां
कुछ खामोशियां
कुछ अधूरा प्यार
कभी मां का दुलार
तो कभी हसीं की बौछार ले आती हूं
और अंदर तक भाव भिवोर हो जाती हूं

मैं एक अदना सी नारी
लिख कर कुछ जज़्बात
खुशियां बिखेर देती हूं
आपके संग संग
अपने अधरों पर भी
एक मुस्कान सहेज लेती हूं....

स्वरचित

©नीलम गुप्ता 

Wednesday, February 10, 2021

किसी का दिल ना तोड़ों तुम ...सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

निज टूटे हुए दिल ले, सभी मेरे पास आते हैं।
हम जोड़ेगे इसे ठीक से, लिए विश्वास आते हैं।

भरी है टोकरी दिल के, टुकड़े से यहां देखो,
इन्हीं टुकड़ों को ले मायुस, बड़ी उदास आते हैं।

जुटाकर दिल के टुकड़े को,सजाये हैं करीने से,
न कोई उल्टा-सीधा हो, यही एहसास आते हैं।

इसे रख सामने अपने, मरम्मत करने बैठे हैं,
मगर ये तो बड़े घायल,गुमे-हवास आते हैं।

लगाते हम हैं जब टांके,लहू इनसे टपकते हैं,
जो इनसे गिरते हैं लोहू, नहीं हमें रास आते हैं।

जोड़े ये नहीं जुटते ,भला कैसे इन्हें छोड़े,
खुदा भी हैं, तो क्या हैं हम,हो निराश जाते हैं।

अगर जुटते ये हमसेे,तो हम भी जोर कुछ करते ,
सभी जाते खुशी मन से,जो हो उदास आते हैं।

मनुज तुझसे है मिन्नत अब, किसी का दिल नहीं तोड़ो,
तुम अपने दिल में यह सोचो,ये मुद्दे खास आते हैं।

-सुजाता प्रिय 'समृद्धि'