मेरी धरोहर..चुनिन्दा रचनाओं का संग्रह

Monday, October 4, 2021

ये चराग़ कोई चराग़ है न जला हुआ न बुझा हुआ ...बशीर बद्र

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कोई फूल धूप की पत्तियों में हरे रिबन से बँधा हुआ वो ग़ज़ल का लहजा नया नया न कहा हुआ न सुना हुआ जिसे ले गई है अभी हवा वो वरक़ था दिल की किताब...
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Sunday, October 3, 2021

प्रतीक्षारत था तपसी एक, खड़ा पावन कालिंदी कूल

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    प्रायः लोग कहते हैं कि पराशर ऋषि ने सत्यवती के साथ संसर्ग किया था,  किन्तु  मेरा हृदय कभी इसे स्वीकार नहीं  कर पाता।  प्रस्तुत है इस विष...
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Saturday, October 2, 2021

एक उद्योगपति को शिक्षक की समझाइश

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  एक उद्योगपति को  शिक्षक की समझाइश  एक बड़े  उद्योगपति शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे-  "देखिए! बुरा मत मानिए ! लेक...
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Friday, October 1, 2021

कुछ एक फैसले मजबूरियों के होते है

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तमाम फतवे कहाँ मुफ्तियों के होते है कुछ एक फैसले मजबूरियों के होते है बुजुर्ग जिनके उठाते नही किसी पे नज़र दुपट्टे सर पे उन्ही बच्चियों के हो...
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Thursday, September 30, 2021

चढ़ती उम्र के साथ .....नीलम गुप्ता

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  चढ़ती उम्र के साथ बुढ़ापे की तरफ जब राह हो जाती अपनी औलाद ही जब आंखे दिखाती तब पतियों को बदलते देखा है पत्नियों की कदर करते देखा है। सारी...
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Wednesday, September 29, 2021

जिंदगी का सफर ....मनोरमा सिंह

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 रश्क-ए-जन्नत बने जिंदगी का सफर। फूल उस पर खिले जो डगर हो तेरी। तुम जो मिले वक्त थम सा गया। मुझको जन्नत लगे रहगुज़र हो तेरी। कौन सा था नशा, ह...
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Tuesday, September 28, 2021

चौराहा और पुस्तकालय ...खेमकरण ‘सोमन’

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चौराहा और पुस्तकालय  चौराहे पर खड़ा आदमी  बरसों से, खड़ा ही है चौराहे पर टस से मस भी नहीं हुआ !  जबकि पुस्तकालय में खड़ा आदमी  खड़े-खड़े ही पहुँच...
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Contributors

  • Digvijay Agrawal
  • Sweta sinha
  • yashoda Agrawal
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