मेरी धरोहर..चुनिन्दा रचनाओं का संग्रह

Sunday, February 9, 2020

गीतों के मधुमय आलाप. ....धनंजय सिंह

›
गीतों के मधुमय आलाप यादों में जड़े रह गए बहुत दूर डूबी पदचाप चौराहे पड़े रह गए देखभाल लाल-हरी बत्तियाँ तुमने सब रास्ते चुने ...
1 comment:
Saturday, February 8, 2020

पुराने दर्द.......रंजना डीन

›
कई बार उभर आते हैं  पुराने दर्द और हम भूल जाते हैं की ये चोट लगी कैसे थी फिर कोई मिलता जुलता  इत्तफाक याद दिला देता है उस चो...
1 comment:
Friday, February 7, 2020

सूखा रहा मन का एक कोना ..रामकृपा

›
बरसात का एक दिन.......! एक औरत जल्दी जल्दी छत की सीढियाँ चढ रही है बुदबुदाये जा रही है अभी तो कपडे सूखने डाले थे सारे कपडे गीले ...
5 comments:
Thursday, February 6, 2020

जो चल सको तो चलो ...निदा फ़ाज़ली

›
सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो इधर उधर कई मंज़िल हैं चल सको तो चलो बने बनाये है...
2 comments:
Wednesday, February 5, 2020

मधुमास की पदचाप....रामानुज त्रिपाठी

›
फिर कहीं मधुमास की पदचाप सुन, डाल मेंहदी की लजीली हो गई। दूर तक अमराइयों, वनबीथियों में लगी संदल हवा चुपके पांव रखने, रात-दिन ...
4 comments:
Tuesday, February 4, 2020

बसंत तुम आ तो गये हो! ....रवीन्द्र सिंह यादव

›
बसंत तुम आ तो गये हो!  लेकिन कहाँ है... तुम्हारी सौम्य सुकुमारता ? आओ! देखो! कैसे कोमल मन है हारता। खेत, नदी, झरने, बर्फ़ील...
7 comments:
Monday, February 3, 2020

एक आम गृहणी का, एक आम दिन.....मृदुला प्रधान

›
एक आम गृहणी का, एक आम दिन....... कभी प्लेट और कभी  थाली में, कभी चेन और कभी  बाली में, कभी 'स्वीपर' में,कभी  माली ...
4 comments:
‹
›
Home
View web version

Contributors

  • Digvijay Agrawal
  • Sweta sinha
  • yashoda Agrawal
Powered by Blogger.