मेरी धरोहर..चुनिन्दा रचनाओं का संग्रह
Saturday, May 11, 2019
श्रृंगार है हिन्दी ....रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
›
खुसरो के हृदय का उद्गार है हिन्दी। कबीर के दोहों का संसार है हिन्दी॥ मीरा के मन की पीर बन गूँजती घर-घर। सूर के सागर - सा विस्ता...
3 comments:
Friday, May 10, 2019
समानता....श्वेता सिन्हा
›
देह की परिधियों तक सीमित कर स्त्री की परिभाषा है नारेबाजी समानता की। दस हो या पचास कोख का सृजन उसी रजस्वला काल ...
5 comments:
Wednesday, May 8, 2019
मेरी माँ ....रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
›
ढिबरी के नीम उजाले में पढ़ने मुझे बिठाती माँ। उसकी चक्की चलती रहती गाय दूहना, दही बिलोना सब कुछ करती जाती माँ। सही वक़्त प...
6 comments:
बिछोह.....पूजा प्रियंवदा
›
मुझ तक आने से पहले ही खर्च चुके थे तुम अपने सारे उम्र भर के वादे गर्मी की किसी दोपहर किसी नीम अँधेरे कमरे में जो होठों स...
2 comments:
Tuesday, May 7, 2019
हिंदी गौरव.....बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
›
(असबंधा छंद) भाषा हिंदी गौरव बड़पन की दाता। देवी-भाषा संस्कृत मृदु इसकी माता॥ हिंदी प्यारी पावन शतदल वृन्दा सी। साजे हिंदी विश्व ...
2 comments:
Monday, May 6, 2019
बिखरकर टूटने का डर ....सुरेश अग्रवाल "अधीर"
›
कहूँ किसको बता यारा सुकूँ दिल को न आता है करूँ मैं कोशिशें कितनी नहीं ये दिल भुलाता है हज़ारों राह ढूँढी पर भुलाना है बहुत मुश्किल ...
8 comments:
Sunday, May 5, 2019
जल ही जीवन है ................सदा
›
लौट आती देह में . . . जल ही जीवन है, नहीं इसके बिना कोई जीवन है, एक बूंद से, निश्वास होती सांस लौट आती देह में, जल ही जीव...
5 comments:
‹
›
Home
View web version