मेरी धरोहर..चुनिन्दा रचनाओं का संग्रह
Friday, August 10, 2018
परेशां आईना है...........सजीवन मयंक
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शब्द को कुछ इस तरह तुमने चुना है। स्तुति भी बन गयी आलोचना है।। आजकल के आदमी को क्या हुआ है। देखकर जिसको परेशां आईना है।। दो...
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Thursday, August 9, 2018
कोई क़ीमत चुका नहीं सकता.....नज़ीर बनारसी
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बुझा है दिल भरी महफ़िल में रौशनी देकर, मरूँगा भी तो हज़ारों को ज़िन्दगी देकर क़दम-क़दम पे रहे अपनी आबरू का ख़याल, गई तो हाथ न आएगी...
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Wednesday, August 8, 2018
शहीद की विधवा.....अमित निश्छल
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वीर रस, जन गण सुहाने गा रहे हैं पंक्तियों में गुनगुनाते जा रहे हैं, तारकों की नींद को विघ्नित करे जो गीत, वे कोरे नयन दो गा रहे है...
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Tuesday, August 7, 2018
राह तकती, वो दो आंखे....निशा माथुर
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दरवाजे की चौखट पर राह तकती, वो दो आंखे, मन में आंशकाओं के उठते हुये बवंडर, दिल मायूसी में डूबा, जैसे कोई खंडहर। किसी भी अनहोनी को ...
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Monday, August 6, 2018
समस्या....सुशान्त प्रिय
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बिना किसी पूर्व-सूचना के एक दिन आ गया प्रलय, भौंचक्के रह गए सारे भविष्यवेत्ता, सन्न रह गया समूचा मौसम-विभाग, हहराता समुद्र लील गय...
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Sunday, August 5, 2018
गमों की आग...हरिहर झा
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गीत धड़कन से निकल कर्कश हुये टकरा ग़मों से, आग की बरसात हुई। बदक़िस्मत! ख़ुदा तक पहुंच कर, लौटी अधूरी मांग लो! दिल की हमार...
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Saturday, August 4, 2018
किरदार......श्यामल सुमन
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बाँटी हो जिसने तीरगी उसकी है बन्दगी। हर रोज नयी बात सिखाती है ज़िन्दगी।। क्या फ़र्क रहनुमा और क़ातिल में है यारो। हो सामने दोनों तो...
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