मेरी धरोहर..चुनिन्दा रचनाओं का संग्रह
Wednesday, February 7, 2018
नदी......रवीन्द्र प्रभात
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उम्र के- एक पड़ाव के बाद अल्हड़ हो जाती नदी ऊँचाई-निचाई की परवाह के बग़ैर लाँघ जाती परम्परागत भूगोल हहराती- घहराती धड़का जाती गाँव ...
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Tuesday, February 6, 2018
बात घर की रही नहीं घर की........निर्मला कपिला
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मेरी शोहरत उड़ान तक पहुँची फिर अना भी उफान तक पहुँची बोझ घर का जो उम्र भर ढोया ज़िंदगी अब थकान तक पहुँची अब न दूंगा उधार लिक्खा ...
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Monday, February 5, 2018
नई पीढ़ी की पाठकीय आकांक्षाएँ....ऋचा वर्मा
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पॉपुलर बनाम क्लासिक की बहस एक नया फिनोमिना है बाज़ार तूलिका मापेगी उसे कोई भी रोमांचक भाव रह-रहकर कर उभरेगा अथवा मनोरंजन की क्षमता बल...
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Sunday, February 4, 2018
हुई सुबह मुट्ठी में भर लेंगे नया आकाश ....श्रीमती मधु सिंघी
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हुई सुबह मुट्ठी में भर लेंगे नया आकाश । उषा किरण होता नव सृजन मन प्रसन्न । मुझमें बेटी सदा प्रतिबिंबित छवि इं...
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Saturday, February 3, 2018
क्योंकि मन जिंदा है.....स्मृति आदित्य
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मन परिंदा है रूठता है उड़ता है उड़ता चला जाता है दूर..कहीं दूर फिर रूकता है ठहरता है, सोचता है, आकुल हो उठता है नहीं मानता...
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Friday, February 2, 2018
ताँका.....डॉ. सुरंगमा यादव
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निज शक्ति का हनुमत को जब हुआ आभास पल में लाँघ लिया निस्सीम पारावार । .................. प्रकृति सदा निरत रहती है निज क...
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Thursday, February 1, 2018
एक इंद्रधनुषी स्वप्निल रंगीला बचपन....कुसुम कोठारी
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ख्वाबों के दयार पर एक झुरमुट है यादों का एक मासूम परिंदा फुदकता यहाँ वहाँ यादों का । सतरंगी धागों का रेशमी इंद्रधनुषी शामियाना ज...
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