मेरी धरोहर..चुनिन्दा रचनाओं का संग्रह
Saturday, February 27, 2016
खनकती चूड़ियाँ....अवधेश कुमार झा
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चूड़ियाँ जब बजती हैं बहुत ही भली लगतीं हैं माँ की चूड़ियाँ बजती हैं सुबह-सुबह नींद से जगाने के लिये ...
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Friday, February 26, 2016
मुझे पुकार लो कभी तुम मुस्कुरा के....सुहानता "शिकन"
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मुझे पुकार लो कभी तुम मुस्कुरा के, झुकी-झुकी सी नज़र से शरमा के। खिले हुए सूरत-ए-कँवल को, दिन बहुत हो चुके, हँसे हुए लब़-ए-ग़...
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Wednesday, February 24, 2016
हम सोचते हैं.....महेश रौतेला
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यह शहर..... आदमी के साथ जीता और मरता है, दादी कहती है उसके ज़माने में ऐसा-ऐसा होता था, माँ कहती है उसके समय में नदी यहाँ तक बहत...
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Saturday, February 20, 2016
कुछ नयी पुरानी क्षणिकायें,,, मंजू मिश्रा
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कुछ नयी पुरानी क्षणिकायें चुटकी भर धूप मुट्ठी भर सपने थोड़ी सी ख़ुशी दो चार अपने बस बीज देंगे जीवन की धरती फिर...
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Tuesday, February 16, 2016
नयी-नयी पोशाक बदलकर, मौसम आते-जाते हैं,
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नयी-नयी पोशाक बदलकर, मौसम आते-जाते हैं, फूल कहॉ जाते हैं जब भी जाते हैं लौट आते हैं। शायद कुछ दिन और लगेंगे, ज़ख़्मे-दिल के भरने में...
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Monday, February 15, 2016
टूटना शुभ होता है कांच का .... सदा
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हर सवाल का जवाब ढूंढना या देना जाने क्यों, कभी-कभी ऐन वक्त पर मुश्किल हो जाता है । गिरकर उठना फिर संभल जाना संभव होता है, नज...
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Friday, February 12, 2016
और फिर नारी ने कहा.....इन्द्रा
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और फिर नारी ने कहा हे नर ! मैं तो हमेशा से वहीँ हूँ जहाँ मुझे होना था न तुम्हारे आगे न पीछे न ऊपर न नीचे बस बराबरी ...
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